Demo post एक परी जो मेरे सपनो में आती
कभी हंसाती तो कभी मुझे जगाती
कभी संग अपने आसमा की सैर कराती
अपनी दुनिया में वो मुझे बुलाती,
में भी उस पर मोहित हो जाता
बस उसे अल्पक निहारता रहता
कभी खिलखिलाता तो कभी खूब बतियाता
उसके बगैर में खुद को तन्हा पता,
अक्सर उसे में छूने की कोशिश करता
कभी उसके संग उड़ चलने को दिल चाहता
उसके आँखो में अक्सर डूब जाता
उसके साथ में खुद को मुस्कुराता पाता
एक परी जो मेरे सपनो में आती
अपनी मुस्कान से वो मुझे रिझाती
कभी पास आकर फिर दूर उड़ जाती
कभी बस मुझे निहारती रहती
मैं भी उससे मिलने को जल्दी सो जाता
उससे बतियाने को में बेताब रहता
एक परी जो मेरे सपनो में आती
कभी हंसाती तो कभी मुझे जगाती
-Vijay Kumar
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है।
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