कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नारी का अपमान
नारी का अपमान
अपमान नहीं करना नारियों का,
उनके बल पर ही संसार चलता है।
नारी से जग चलता है,
नारी बिन अधूरा जग।1।
*नारियाँ अपमान को ना सहते जाओ,*
*दुष्टों को दण्ड देती जाओ।*
अपने जीवन में अंधकार को मिटाती जाओ,
अपने जीवन में रोशनी की खुशियाँ बनाते जाओ।
नारी का अपमान करना किसी के स्वभाव में हो सकता है,
नारी का सम्मान करना हमारे स्वभाव में होना चाहिए।2।
कर खुलकर विरोध अत्याचारियों का,
भ्रष्टाचारियों को मिटाती जा।
इस संसार को सुखों से भरती जा,
दिलो में बस जाये तो मोहब्बत है।3।
कभी दुर्गा तो, कभी काली है,
लुटेरा है अगर आजाद तो सबका अपमान है।
लुटी है नारी तो लुटा सबका सम्मान है,
जो स्त्री का अपमान करता है।4।
जो माँ का अपमान करता है,
वो भगवान का अपमान करता है।
जो भगवान का अपमान करता है,
उस इंसान का अंत निश्चित है।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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