कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- साहित्य समाज का दर्पण है।
साहित्य समाज का दर्पण है
साहित्य समाज का दर्पण है।
जीवन साहित्य को अर्पण है।
साहित्य समाज की परछाई है।
साहित्य से नही कोई रुसवाई है।1।
अंधकार है वहाँ,जहाँ आदित्य नही है।
मुर्दा है वह देश जहाँ साहित्य नहीं है।
साहित्य लेखन में सफलता न मिले,
जहाँ सामाजिक जागरूकता नहीं है।2।
लोगो के चेहरे और मन को,
साहित्य से पढ़ लेता हूँ।
कल क्या थे? आज क्या बन गये।
मनोरंजन के हर राहों में मुझे,
साहित्य द्वार नजर आता है।3।
माँ शारदे के आशिर्वाद से,
मुझमें हौंसला नजर आता है।
साहित्य समाज का दर्पण है।
जीवन साहित्य को अर्पण है।4।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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