कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- काव्य संसद् ऑनलाईन
काव्य संसद् ऑनलाईन
कवि हूँ काव्य संसद् ऑनलाईन का,
कवि पी रहा असफल का जहर।
बैठा हूँ शांत गाँव के गली पर।
तारीफ नही अपनी कविता पर।
फिर भी तालियों की बौछार।
हँसी-मजाक करते-करते,
लिख डाला मैं कविता।
फिर भी बनाता है कवि,
अपने कविता का जयकार।
कितनों ही पाठक का पहचान बना,
काव्य संसद् ऑनलाईन का।
कविता देता है ज्ञान और मान।
कविता बनाता कितनों को महान।
निर्भीक,मधुर,प्राॅज,प्रिय बनकर,
युवा बढ़ायेंगे साहित्य का सम्मान।
कविता सिखाती,सीख जीवन की,
कविता बड़ा रही है मान।
कविता पाठ पढ़ा देती सम्मान,
कवियों पर है मुझे अभिमान।
करते सबका मान-सम्मान,
निर्भीक,मधुर,प्राॅज व प्रिय।
कवि हूँ काव्य संसद् ऑनलाईन का।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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