कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- ना समझो कमजोर मुझे
ना समझो कमजोर मुझे
ना समझो कमजोर मुझे,
नही डरता कमजोरी से।
एक दिन इतिहास रच दूंगा,
मैं अपनी कमजोरी से।1।
तू बैठ न उदास होकर,
करने को बहुत कुछ है।
मन में छिपे आस को जगा,
करने को बहुत कुछ है।2।
मन मे विश्वास जगाना है,
कलम को ताकत बनाना है।
जो समझ रहे कमजोर मुझे,
उन्हें अब आइना दिखाना है।3।
एक बार आत्म विश्वास भर जाने दो,
डर जायेगा डर चुनौती आने तो दो।
कमजोर कहने वाले हर इंसान देखेगा,
एक बार मंजिल पाने तो दो।4।
मान लो डर के आगे जीत है,
कदम चुमेगी कामयाबी तेरा,
कदम अब आगे बढ़ाते जाना,
दुनिया देखेगा कामयाबी तेरा।5।
भरनी है ऐसी उड़ान मुझे,
अब नही मुझे डरना है।
बाज की तेज रफ्तार से,
ऊँचाईयों को अब छुना है।6।
ना रोक पायेगा कोई ताकत,
अपने मंजिल को पाने से।
कमजोर कहने वाले को प्रिय,
दिखाओ मंजिल पास आने से।7।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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