कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- बेमौसम बरसात
बेमौसम बरसात
आसमान में बादल छा रही है।
आँधी,तूफान आ रही है।
गरज और चमक के साथ,
बेमौसम बरसात हो रही है।1।
मुझे न कुछ कहती न कुछ सुनाती है।
दिल में खामोशी का जिक्र करा जाती है।
दूर होकर भी नजदीकी,
का एहसास दिला जाती है।2।
मुझे मौसम भी बेमौसम लगने लगा।
हर पल तेरी याद में दिल तड़पने लगा।
बेमौसम बरसात की हवा चुभने लगा।
दूजा हो जाये तो साँसे घुटने लगा।3।
बेमौसम बरसात हो रही है।
दिल में हलचल मचा रही है।
दूर हो फिर भी नजदीकी,
का एहसास दिला रही है।4।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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