कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- माॅं की ममता ईश्वर का वरदान
माॅं की ममता ईश्वर का वरदान
माॅं की ममता ईश्वर का वरदान है,
सच पूछो तो माॅं ईश्वर नही भगवान है।
माॅं को नाराज करना तेरी भूल है,
माॅं के कदमों की मिट्टी जन्नत की धूल है।
माॅं से मिलता जीवन हमको,
माॅं के मिलता दुलार हमको।
माॅं मुझको तेरी दुआ चाहिए,
तेरे आंचल की ठंडी हवा चाहिए।
माॉं-बेटे का रिश्ता कुछ ऐसा की,
माॅं उदास रहे तो मुस्कुरा ना सके।
जब परेशानी में फंस जाते है परदेश में,
आँसूओ को पोंछने सपनों में आ जाती है माॅं ।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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