कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- सोच को चमकने दो
सोच को चमकने दो
जैसा हम सोचते है,
वैसा ही बन जाते है,
जैसा हम कर्म करते है,
वैसा ही हमें फल मिलता है,
सृष्टि हमारे कर्म का आधार होता है,
तभी हम खुद में खुद का दर्शन चाहते है,
जैसा हम सोचते है,
वैसा ही बन जाते है,
जैसा हम कर्म करते है,
वैसा ही हमें फल मिलता है,
मन में हो शुभ संकल्प तो,
जीवन में किस चीज का दुख,
जब मन में शुभ भावना हो तो,
दिल भी सावन जैसा होता है,
हार कर भी हार नहीं मानता,
सदैव जीत उसी की होती है,
घनघोर अंधेरे में जलती हुई,
जगमग उसकी ज्योति है,
जैसा हम सोचते है,
वैसा ही बन जाते है,
जैसा हम कर्म करते है,
वैसा ही हमें फल मिलता है।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम-निठोरा, पोस्ट-थरगांव तह- कसडोल, जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मोबाइल- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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