क्रमाॅंक:- 115, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मन के ऑंसू
मन के ऑंसू
मेरा मन तू तोड़ चली,
अकेला मुझको कर गई।
ऑंखों में ऑंसू देकर,
मुझको पराया कर गई।१।
मुझको रूशवा कर गई,
क्यों मुझसे की बेवफ़ाई।
रो रोकर ऑंखें हुई नम,
फिर भी पास नहीं आई।२।
गमों के बीच बैठकर मैं,
तुझको याद किया करता हूॅं।
तू मुझे बहुत सताती है,
दिन-रात सो नहीं पाता हूॅं।३।
तेरी एक मुस्कान के लिए,
सारे दुख ले लेता हुं।
ऑंखों में न आये ऑंसू,
हर दुख सह लेता हूं।४।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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