क्रमाॅंक:- 153, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नजराना

क्रमाॅंक:- 153, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नजराना

                          नजराना
      ना नजर था ना नजराना था,
आपका आना था और हमारा जाना था,
क्या करे इसे किस्मत का खेल कहे,
और कहे इसे गैरो का अफसाना था,
जहां किस्मत हमसे रूठी और वो मान गये,
तब से हमने ईश्वर को जान गये,
इसके पहले हमे ना कोई पहचाना ना 
था नजर था ना नजराना था,
जब तुम यादों के झरोखों मे याद आते थे,
जब हम मिल के वो राग गाते थे,
कहना ना मुझे कभी तेरा दीवाना था,
था नजर था ना नजराना था ।।

    परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
       8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com

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