क्रमाॅंक:- 171, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- वीरांगना रानी दुर्गावती
वीरांगना रानी दुर्गावती
गोड़वाना साम्राज्य की बहादुर बेटी,
नाम जिनका था रानी दुर्गावती।
अपने प्राणों की कुर्बानी दे दी
देश खातिर वीरांगना रानी दुर्गावती।१।
हिंद देश में गूॅंज रहा है उनके,
शौर्य और आदर्शों की गाथा।
भारत माॅं की बहादुर बेटी के,
मूरत पे चमक रही शौर्य गाथा।२।
जन्म हुआ पंद्रह सौ चौबीस में,
कोलकाता के चंदेल परिवार में।
पिता सालबान व माता माहोबा थी।
दुर्गाष्टमी को जन्मी दुर्गा का अवतार थी।३।
युवावस्था में तलवार बाजी,घुड़सवारी,
और तीरंदाजी आदि विधाऍं सीखी।
कभी न झुकी मुगलों के आगे,
दुर्गावती ने कभी हार मानना न सीखी।४।
दलपत शाह के संग विवाह हुआ,
बनी दुर्गावती गढ़ मंडला की रानी।
युवावस्था में पति के स्वर्गवास से,
गढ़ मंडला का बुरा हाल हुआ।५।
दुख के इस संकट में नहीं खोयी धैर्य।
मंडला पर कब्जा करने मुगलों का
सपना दुर्गावती ने चूर-चूर किया।
नहीं डरी मुगलों के किसी वार से।६।
रानी दुर्गावती होकर घोड़े पे सवार,
पाॅंच वर्ष के बेटे को बाॅंधकर चली पीठ पर,
मुगलों के हर वार का देने जवाब,
दुर्गावती ने मुगलों को भगाया करके वार।७।
दुर्गावती को अबला समझ के,
आसफ खान ने उनपे हमला बोला।
रण में देख दुर्गावती की चंडी सी हुंकार,
उनके दुश्मनों का मनोबल डोला।८।
मंडला में हमला करने के लिए,
आसफ खान ने रात्रि को योजना बनाई।
दुर्गावती होकर हाथी सरमन पे सवार।
मंडला बचाने को अपनी जान लगाई।९।
रानी दुर्गावती थी साहस और निडर,
मुगल सैनिकों से खुद को बचाई।
आसफ खान के हाथों मरना ना चाही,
खुद के खंजर से अपनी जान गंवाई।१०।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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