क्रमाॅंक:- 202, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- बिजली गुल से जनता परेशान
बिजली गुल से जनता परेशान
ऑंधी, तूफान और बरसात नहीं,
फिर भी बिजली गुल बार-बार।
बिजली के ऑंख मिचौली से अब,
जनता खड़े हैं परेशानी के धार।१।
कभी टूटता बिजली के तार,
कभी उड़ जाता ट्रांसफार्मर।
जिससे जनता है परेशान,
फिर अधिकारी क्यों बना लाचार।२।
मच्छर काटने से जनता बेहाल है,
बिजली बिना पंखा, कूलर बेकार है।
मच्छर काटने से डेंगू का आसार है,
अधिकारियों से जनता निसार है।३।
चाहे करो तुम विनती ना होगा काम,
काम जल्दी हो दिखा दो पैसा और जाम।
दुनिया में इसके बिना कुछ नहीं होता,
विद्युत से जुड़ा ऐसे अधिकारियों का नाम।४।
करते कार्य दो का चार दिन में,
हर जनता को करके परेशान।
ओवरलोड का हवाला देकर,
खुद करे आराम जनता परेशान।५।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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