क्रमाॅंक:- 287, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- बेटी है अनमोल
बेटी से दुलार है करो ना तिरस्कार।
कुदरत का दिया हुआ अनमोल है उपहार।।
माँ के गर्भ से अवतरण लिया।
मुझको लक्ष्मी धन रब दिया।।
मुझको बेटी मिला किस्मत वाला हूँ।
बेटी के पिता कहलाने वाला हूँ।।
बेटी मेरी आन बान और शान है।
बेटी सदा श्राप नहीं वरदान है।।
बेटी घर परिवार की मुस्कान है।
देश का भविष्य बेटी से पहचान है।।
मेरे आँगन की शोभा गीत,धान्या है।
माता - पिता का गर्व तान्या है।।
पढ़ - लिख के बेटी सदा बढ़ाती मान।
अपने बुद्धि से संसार में बनाती पहचान।।
बेटी ने उम्र पार किया किशोरावस्था।
सुधार दिया संसार का अर्थव्यवस्था।।
बेटी का विवाह हुआ गई पति के संग।
पति-पत्नि एक दूजे के प्यार में गये रंग।।
सास-ससुर बहु को सारे काम सिखाती।
ससुराल में बेटी बहु के फर्ज निभाती।।
गूँज उठा बच्चों की किलकारी।
घर में आई नन्ही प्यारी दुलारी।।
बनके फौजी, शिक्षक, इंजीनियर।
हिंदुस्तान के गंदगी को करेगी क्लीयर।।
नारी बिना अधूरा है ये सारा संसार।
माता-पिता परिवार से मिलता है प्यार।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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