क्रमाॅंक:- 305, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- सदा बोल मीठे अल्फाज
तेरे अल्फाज को सुन मन गदगद होने लगा।
तुझे देखकर मन मेरा धड़कने लगा।।
अल्फाजों के इस दुनिया में पैसा ही अनमोल है।
दुनिया में इंसानियत का नहीं कोई मोल है।।
इंसानों को सोच समझ के बोलना पड़ता है।
एक दिन गलत अल्फाज से पछताना पड़ता है।।
मीठे ना हो बोल तो रिश्तों में दरार आ जाती है।
अल्फाज में कड़वाहट हो तो, रिश्ते टूट जाती है।।
मधुर वाणी से सदा मिलता है सम्मान।
इंसानों को उसी से मिलती है पहचान।।
'प्रिय' कहता है इंसानों से सदा मीठे बोल।
मन के मीठे अल्फाज का तू दरवाजा खोल।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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