क्रमाॅंक:- 374, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नसीब मेरा दुश्मन
परमानंद के नसीब को कैसे बनाये भगवान।
प्रेम से भरे राह में मिला नहीं पहचान।1।
जग के शुभ काम को करके बैठा हूँ नाथ।
जन्म से क्यों रखा नहीं सिर में मेरे हाथ।2।
माता प्रेम भाव से नसीब बना है आज।
बीठा के मुझे गोदी में करते सारे काज।3।
परमानंद के मुस्कान को मानव सभी देखा।
मेरे जीवन के नसीब को माता ने लिखा।4।
सदा भोला भाला हूँ सभी देना प्यार।
बदल के नसीब मेरा माँ घुमाये संसार।5।
मेरे हाथ की लकीर अब बदलने लगा है।
मेरे लिए नसीब मेरा दुश्मन होने लगा है।6।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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