क्रमाॅंक:- 419, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- किन्नर
महिला पुरुष के जाति नहीं; फिर भी वो इंसान हैं।
सुख-दुख सभी को आता; सृजन किया भगवान है।।
मानव करते भेद है; उनके मन के बात जान।
मन में भेदभाव रखो नहीं; इनका भी करो मान।।
रब ने अपने हाथों से; सुंदर रूप बनाया है।
सुंदर सारे मिट्टी से; मानव को पिरोया है।।
हर बच्चों को आशीष दिया; जो मन से आगे बढ़ा है।
जग के इस विधाता ने; हम सबको गढ़ा है।।
षष्ठी हो या विवाह हो; देने को शुभकामना बुलाते हैं।
इनके आशीष पाये जो; गंगा को नहाते हैं।।
आज भी समाज में; किन्नर को माने छुत।
मानव घुमे इनके भेष में; रहा न कोई सुत।।
यही हमारा कर्म फल है; इनके मन में दया।
अलग-अलग मानव के मन; कोई दयालु कोई भाया।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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