क्रमाॅंक:- 535, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष छंद मुक्त रचना- धनतेरस व भगवान धन्वंतरि
कृपा करो धन्वंतरि,मन में खुशियाँ छाई।।
समुद्र मंथन के समय,अमृत कलश लाई।
सुख समृद्धि धन देव से,देवता अमृत पाई।।
चार भुजा धारी हैं, विष्णु के अवतार।
आयुर्वेद अमृत कलश,करे कमल सवार।।
धनतेरस को पीतल,चाँदी, खरीद शुभ यह दिन।
धन्वंतरि से आयुर्वेद मिला, नहीं रहा कोई हिन।।
नया वस्त्र गहना लेकर, धनतेरस खुशी से मनाये।
फूलझड़ी,पटाखें संग,घर में दीप जलाये।।
धन्वंतरि के वरदान से,मिटे दुख हजार।
माँ लक्ष्मी के हाथ से,धन मिलता अपार।।
धनतेरस के पुण्य दिन से, सब में है उल्लास।
घर ऑंगन दीपक जले,रोशन करें प्रकाश।।
माँ लक्ष्मी व सरस्वती,गणपति के साथ।
सब साधक पूजा करें; भक्त झुकाते माथ।।
घर-घर दीपक जले, घड़ा अमृत कलश।
धन्वंतरि धन के देवता,जीवन करो प्रकाश।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-सोनाखान,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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