क्रमाॅंक:- 567, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- वेदों का अंश वेदांश

क्रमाॅंक:- 567, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- वेदों का अंश वेदांश

.            वेदों का अंश- 'वेदांश'

वेदांश वो जो अनंत है...
न उसकी कोई सीमा,
न कोई रूप उसे बांध सके,
न शब्द लिख पाए दर्शन उसके,
न कोई गा सके उसकी लीला —
वेदांश वो जो अनंत है....

जब वृत्ति हो सद्कर्मों की,
तो चरणों की धूल मिले,
दिव्य ज्योति की अद्भुत लौ
मन को छू ले अमृत-सी;
जब चेतना हो शुद्धि में लीन,
मलीन भाव क्षण में विलीन —
तन-मन निर्मल हो उठे,
धन्य हो जीवन, धन्य हो प्रीति,
पाकर उसकी क्रीड़ा,
वेदांश वो जो अनंत है....

अब न मैं कुछ देखता,
सब कुछ उसी पर छोड़ता हूँ;
जैसी उसकी इच्छा, वैसा मेरा प्रवाह,
उस दिशा में बहता चला जाऊँ।
इस सत्ता पर जीवन अर्पित,
बारंबार उसी में समर्पित,
निश्छल दृष्टि से,
खंडहरों को भी गले लगाऊँ;
मैं जीवित मृत,
पर मेरे अवशेष बोलते हैं —
वेदांश वो जो अनंत है...

                 परमानंद निषाद 'प्रिय'

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