क्रमाॅंक:- 572, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- शक्ति-पुंज नारी
शक्ति-पुंज नारी
जहाँ खिले नारी चरण, झुकते देव सुजान।
शस्त्र-शास्त्र गाते सदा, युग-युग यही प्रमाण।।1।।
जहाँ पूज्य नारी रहें, गूँजे यही विधान।
अस्तित्व का सम्मान ही, सच्चा गौरव-मान।।2।।
भोग-वस्तु जो मानते, तज विवेक अज्ञान।
ज्वाला पावक रूप वह, शिव का है वरदान।।3।।
ममता भी इक शस्त्र है, वज्र सरीखा नेह।
अग्नि-शिखा सी शुद्ध है, पावन उसकी देह।।4।।
पाप बढ़ा जब विश्व में, जागीं महाकराल।
विकट रूप धर धार ली, मुंडों की तब माल।।5।।
पौरुष जिसमें पूर्ण है, वह ओजस की खान।
रणचंडी बन कर करे, असुरों का कल्याण।।6।।
अबला कहना पाप है, शक्ति-पुंज संसार।
नारी ही नारायणी, महाकाल आधार।।7।।
सुप्त शक्ति को त्याग कर, कर लो अब पहचान।
हनुमत ज्यों हुंकार भर, पाओ निज सम्मान।।8।।
बीज सुप्त जो रह गया, अंकुर कैसे पाय।
बिन लड़कर तो भाग्य भी, शुभ फल नहिं उपजाय।।9।।
राधा मीरा जानकी, रणचंडी के नाम।
लिखा क्रांति पैगाम है, इतिहासों के धाम।।10।।
शक्ति-पुंज नारी बनी, तज कर सुख-सामान।
रण में चंडी रूप धर, बढ़ाया देश-मान।।11।।
रण में चंडी रूप धर, बढ़ाया देश-मान।।11।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
0 Response to "क्रमाॅंक:- 572, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- शक्ति-पुंज नारी"
एक टिप्पणी भेजें