क्रमाॅंक:- 597, सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- भाई-बहन का अटूट प्रेम
भाई-बहन का अटूट प्रेम
स्नेह डोर से हैं बँधे, भाई और बहन।
खुशियों से आँगन भरे, महके सारा चमन।।1।।
भाई रक्षक ढाल है, बहना है मुस्कान।
एक दूजे के वास्ते, तज दें अपनी जान।।2।।
लाल कोट में लाड़ली, नील वरण में भ्रात।
एक दूजे का साथ ये, जैसे दिन और रात।।3।।
बचपन की यादें सजी, मीठी सी तकरार।
बढ़ता जाए उम्र संग, भाई-बहन का प्यार।।4।।
घर की रौनक बिटिया, भाई का अभिमान।
पावन रिश्ता यह सदा, दुनिया में महान।।5।।
हाथ थाम कर चल रहे, राहों में हरदम।
कभी न आँखें हों सजल, कभी न होवे गम।।6।।
खड़े पास में प्रेम से, मुख पर है विश्वास।
ईश्वर पूरी ही करे, इनकी हर इक आस।।7।।
भाई की हिम्मत बहन, बहना का आधार।
अटूट रिश्ता यह रहे, सदा रहे सत्कार।।8।।
सूरज चाँद चमकते, अम्बर के विस्तार।
वैसे ही चमकें सदा, ये दोनों संसार।।9।।
शुभ आशीष मिले इन्हें, सुख वैभव अपार।
वैसे ही चमकें सदा, भाई-बहन का प्यार।।10।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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