क्रमाॅंक:- 617,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नौतपा का प्रकोप

क्रमाॅंक:- 617,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नौतपा का प्रकोप

                नौतपा का प्रकोप

नभ से बरसें अँगारे, विकल हुआ संसार।
नौतपा की धूप से, हाहाकार अपार।।1।।

तपती धरती तवे सी, जलती चारों ओर।
सूरज आँखें लाल कर, ढाए भीषण जोर।।2।।

भास्कर चमके गगन में, आग उगलती धूप।
नौतपा ने रूप यह, धारा अति विकराल।।3।।

पशु-पक्षी व्याकुल भये, ढूँढें शीतल छाँव।
सूनी गलियाँ हो गईं, सूना सारा गाँव।।4।।

जेठ महीना आ गया, तपने लगे पहाड़।
नौतपा के कोप से, सूखा नद और झाड़।।5।।

सूखे पोखर और नद, तड़प रही है जान।
जल की बूँदें ढूँढता, जग में हर इंसान।।6।।

बादल भी सहमे खड़े, देख सूर्य का तेज।
धरती मानो सो रही, अंगारों के सेज।।7।।

दूपहरी ऐसी तपे, सूना हुआ जहान।
घर में दुबके लोग सब, थमा हुआ इंसान।।8।।

पवन बहे अति गर्म सी, लू के थपेड़े संग।
नौतपा ने छीन ली, इस जीवन की उमंग।।9।।

धरती अंबर सब तपे, बरसे आग अगाध।
मेघराज अब आइये, मेटो जग की व्याध।।10।।

                       परमानंद निषाद 'प्रिय'

0 Response to "क्रमाॅंक:- 617,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नौतपा का प्रकोप"

एक टिप्पणी भेजें

Ads on article

Advertise in articles 1

advertising articles 2

Advertise under the article