क्रमाॅंक:- 668,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- जीवन के सच्चे साथी
जीवन के सच्चे साथी
जीवन के हर मोड़ पर, जो निभाते हैं साथ।
मित्रता दिवस की बधाई, जोड़कर दोनों हाथ।।
ममता की मूरत खड़ी, माँ का पावन प्यार।
चरणों में जिसके बसा, खुशियों का संसार।।
पिता थामते हाथ जब, दूर होए हर त्रास।
साया बन रक्षक खड़े, मन में दृढ़ विश्वास।।
भाई जैसा मित्र ना, दूजा जग में कोय।
सुख-दुख में तत्पर खड़ा, संकट कटीला होय।।
स्नेह लुटाती हर घड़ी, बहना प्यारी राज।
दुआ मांगती भाई की, सजता जिससे आज।।
सच्चा दोस्त वही मिले, जो न छोड़े हाथ।
पतझड़ में सावन खिले, जब हो उसका साथ।।
माँ-बाप भाई बहन, और सखा अनमोल।
जीवन की इस राह में, इनका कोई न मोल।।
भीड़ पड़ी जब शीश पर, दोस्त निभाए प्रीत।
बिना स्वार्थ के जो चले, वही जगत की रीत।।
प्रेम भाव बढ़ता रहे, रहे न कोई क्लेश।
मुबारक हो सबको यहाँ, मित्रता का संदेश।।
रिश्तों की इस डोर को, रखो हमेशा थाम।
सुरजीत कहे इस प्रेम को, बार-बार प्रणाम।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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