क्रमाॅंक:- 670,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- आक्रोश की गूंज
आक्रोश की गूंज
सड़कों पर उतरा है जन-सैलाब,
हाथों में तख्तियां, आँखों में ख्वाब।
जंतर-मंतर की ऐतिहासिक दीवारों तले,
अन्याय के खिलाफ आज न्याय के दीप जले।
कोई मांग रहा किसानों का अधिकार,
कोई कह रहा, बंद करो अब भ्रष्टाचार।
एक सुर में गूंज रही है बस यही पुकार,
नहीं चलेगी अब किसी की भी तानाशाही सरकार।
नारी शक्ति ने भी उठाई है अपनी आवाज़,
बदलने चला है आज रूढ़ियों का समाज।
केसरिया झंडों पर लिखा है 'इंकलाब जिंदाबाद',
हक की लड़ाई से ही होगा देश अब आबाद।
यह केवल भीड़ नहीं, चेतना का उफान है,
लोकतंत्र की रक्षा में लगा हर इंसान है।
जब-जब जनता इस तरह उठ खड़ी होगी,
तब-तब हर दमनकारी शक्ति घुटने पर होगी।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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