क्रमाॅंक:- 687,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- ऋचा: एक सौम्य मूरत
ऋचा: एक सौम्य मूरत
चेहरे पर खिली यह मंद हँसी,जैसे भोर की पहली किरण,
आँखों में छुपा विश्वास नया,छू लेता है जो सबका मन।
काले परिधान के वैभव में, इक सादगी की मूरत है,
यह रूप नहीं केवल सुंदर, यह भीतर की ही सूरत है।
संयम की साफ झलक दिखती, हाथों की सहज मुद्राओं में,
ठहराव छुपा है गहरा सा, इन शांत, हसीं फिजाओं में।
फैशन का केवल रंग नहीं, व्यक्तित्व का पावन दर्पण है,
हर एक भाव में ऋचा बहन, जीवन का सुंदर अर्पण है।
ना कोई तड़क, ना कोई भड़क, बस सौम्य भाव की सरिता है,
जिसमें जीवन के सत्यों की, लिखी हुई इक कविता है।
यह शांत खड़ी जो सोच रही, सपनों को सच कर जाना है,
अपनी मेहनत के दम पर ही, अपना एक नाम कमाना है।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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