क्रमाॅंक:- 689,सोनाखान, जिला-बलौदा बाजार,छत्तीसगढ़ से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- भाई-बहन का अनुपम स्नेह
भाई-बहन का अनुपम स्नेह
(दोहा छंद)
सजी थाल सिंदूर की, बंदनवार अनूप।
रक्षा-सूत्र बँधा रहे, भाई का यह रूप।।
माथे पर सजता तिलक, हँसे वीर बलवान।
बहन मिले आशीष है, बढ़े जगत में मान।।
युग-युग यह नाता रहे, महके जीवन-बाग।
भाई का आशीष है, बहना का अनुराग।।
खुशियाँ बिखरीं द्वार पर, मन में हर्ष अपार।
धागा पावन प्रेम का, रचे नया संसार।।
हँसता मुख है वीर का, मन को देता चैन।
सुख-दुख में जो साथ दे, भाई के वह नैन।।
माली जैसे सींचता, उपवन की हर डाल।
वैसे ही भैया रखे, बहना का हर ख्याल।।
रेशम का यह तार है, जैसे लोह-कपाल।
सदा सुरक्षित वीर हो, काटे संकट काल।।
बहन उतारे आरती, अर्पित करके प्राण।
संकट सारे टल गए, देकर ही कल्याण।।
मुस्कानें बिखरीं यहाँ, मिटे हृदय का शूल।
भाई-बहना नेह अति, जैसे महके फूल।।
गंगा-यमुना की तरह, बहे नेह की धार।
सदा अमर जग में रहे, राखी का त्योहार।।
परमानंद निषाद 'प्रिय'
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