कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की दुनिया के रिश्तों पर विशेष कविता- मतलबी दुनिया
मतलबी दुनिया
मतलबी दुनिया मे कोई किसी का नही।
रिश्ते खास होते है,भ्रम मे रहना नहीं।
आज मेरा दिन तो कल तेरा दिन।
रिश्ते आस्तीन के साँप यही है सही।1।
मतलबी दुनिया के सांचे ने हमको यूँ ढाला है।
रिश्तों की कद्र नहीं सिर्फ दिखावा है।
जिन्हें हम समझ बैठते हैं अपने,
ओ तो बस एक छलावा है।2।
*यहाँ तो सागर भी बड़ा मतलबी निकला,*
*जान लेकर कहता है लाश किनारे लगा दो।3।*
मतलबी दुनिया से क्या? शिकायत करूँ।
मतलबी दुनिया में किससे क्या? कहूँ।
ये दुनिया ने कड़वी जबान से इतने जख्म दिये,
इनके दिए कितने दर्द को मैं सहूँ।4।
दुनिया से अच्छी तो परछाई है।
जिसने हमेशा साथ निभाई है।
मेरे मौत से अपनी परछाई का दम तोड़ देती है।
इस मतलबी दुनिया मे कोई किसी का नही।5।
यहाँ बरसते बादल का मौसम बदल जाता है।
तो दुनिया के इंसान तो बदल ही जायेगा।
कोई किसी का नही आज इस दुनिया में,
सब लोग अपने आप मे खोये हुए है।6।
मतलबी दुनिया मे कोई किसी का नही होता।
आज मेरा दिन तो कल तेरा दिन।
रिश्ते खास होते है इस भ्रम में नही रहना।
आधे से ज्यादा रिश्ते आस्तीन के साँप होते है।7।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
0 Response to "कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की दुनिया के रिश्तों पर विशेष कविता- मतलबी दुनिया"
एक टिप्पणी भेजें