कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की गाँव पर विशेष कविता- मेरा गाँव
मेरा गाँव
जंगल और पहाड़ों के बीच में,
बसा हुआ है मेरा गांव,
अपना जंगल बिच बसेरा,
प्रेम के पीहर में जन्मे हम,
वो तीजों का त्योहार,शादी बरातें,
मोहब्बत के रिश्ते-मोहब्बत की बातें,
काट दिये है सब पेड़ कही नही है छांव,
कहते सीना ठोंककर बदल रहा मेरा गांव,
घरों के बीच कुछ दूरियां जाती थी,
तब दिल पास-पास हुआ करते थे,
दिल है छोटी सी कश्ती जो,
खोई बड़ी लहर में है,
कुछ समय बीता वो बच्चे बड़े होकर,
उसी बस में बैठकर शहर आ गये,
शहर जाकर बैठ गया हर शख्स पैसों के लिए,
ख्वाहिशों ने मेरा पूरा गांव खाली कर दिया,
मां के आंचल और पिता जी की परछाई,
समान गगन में उड़ने अपने गांव चले हम,
खींच लाता है गांव में बड़े-बूढों का आशीर्वाद,
दूध,शक्कर के साथ गेहूं की रोटी का स्वाद,
जंगल और पहाड़ों के बीच में,
बसा हुआ है मेरा गाँव ।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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