कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की माँ सरस्वती पर विशेष कविता- सरस्वती वंदना
सरस्वती वंदना
हे हंस वाहिनी, ज्ञान दायिनी।
ज्ञान का प्रकाश दो,ज्ञान का प्रकाश दो।
तुम स्वर की देवी है तुझसे संगीत,
हर शब्द तेरा है तुझसे गीत।
विद्या तुम देने वाली,
ज्ञान का प्रकाश दो।
मोह,माया और अज्ञान का,
संसार से उसका अंत करो।
सिर झूंका कर माँगू माँ,
मेरा विनती स्वीकार करो।
तेरे चरणों में आया हूँ,
मेरा करो उद्धार माँ।
श्वेत हंस की करे सवारी,
और श्वेत वस्त्र धारण किये।
माँ शारदे श्वेत हंस में बैठे,
कंद पर रखे अपना चरण।
माँग रहा हूँ तुझको माँ,
मैं विद्या का वरदान।
तेरे शरण मे आया हूँ माँ,
दो मुझे विद्या का वरदान।
या देवी सर्वभूतेषू विद्यारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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