कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नारी का संघर्ष
नारी का संघर्ष
जब जब नारी का अपमान हुआ है,
तब तब घमासान हुआ है।
देखो अंतिम बार देहरी,लोग मुझे पुजवाते है,
आकर के पापा इनको क्यों नही धमकाते है,
सबसे संघर्ष करके भी,कुछ करने को सोचती हूँ,
अपने ही लोगों द्वारा रोक दिया जाता हूँ।
सपनों का कोई आज महल तोड़ चला है,
जीवन में जो आया था मुख मोड़ चला है,
अपराध हुआ है महिला पर,
उसे जात-धर्म मे बांट रहे,
कुछ चालाक पाखंडी अपने ही,
समाज की जड़ो को काट रहे,
नारी है इक त्याग की मूरत,
ममता और है प्यार की पूरक,
फिर भी कुछ कमी रह जाये तो,
सबकी बातें सुनने वाली,मैं वही नारी,
माँ,बेटी,बहन,पत्नी हर रिश्ता है उससे,
सोच एक नारी में खूबियाँ कितनी सारी है,
ऐ नारी तू खुद की पहचान बन,
शक्ति का अस्तित्व तू,दुर्गा का अभिमान बन,
अबला नही नारी शक्ति का केन्द्र है,
आफत में दुर्गा बन हुंकारती है औरत,
तुमने ही दिया नारी को नाम,
हे माँ तुझे मेरा प्रणाम।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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