कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- धनतेरस दीप जलाना है।
धनतेरस दीप जलाना है
समृद्धि का दीप हमें जलाना है,
सबके चेहरे पर मुस्कान खिलाना है।
हमें दुख को सुख में बदलना है,
धनतेरस में अरमान खिलाना है।1।
प्रकाश पर्व पर खुशियाँ खिले,
नवनीत खुशी पक्षी चहके।
प्रेम का दीप जलाना है,
मन से घृणा मिटाना है।2।
चहुँ ओर दीप से रोशन होगा,
मानव नैतिकता का मूल्य होगा।
अंधकार हमे मिटाना होगा।
प्रकाश का दीप जलाना होगा।3।
बदल रहा है जीवन काल,
उत्तम होगा आचरण ढाल।
भय में सब लोग जी रहे,
"प्रिय" अब उन्हें संभाल।4।
रामराज्य हमें लाना है,
मन का दीप जलाना है।
खुशियों की बहार लाना है,
धनतेरस दीप जलाना है।5।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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