कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- हिमालय
हिमालय
नेपाल, चीन सीमा पर स्थित,
हिमालय पर्वत की चोटी।
गंगा यही से निकलती है,
पत्थरों के साथ बहती है।
हिमालय को पर्वत राज,
नाम से जाना जाता है।
पर्वतों का राजा माउंट एवरेस्ट,
सबसे ज्यादा ऊंची चोटी है।
हिमालय पर्वत की ऊंची चोटी,
मीटर मे है 8,848।
62 साल पहले भारतीय सर्वे मे,
नापा गया 29028 फीट।
आंख हिमालय पर्वत से है,
आंसू की कोई धार्मिक नहीं।
शिव के आंखों से जब निकले आंसू,
पृथ्वी पर गिरकर उगा रुद्राक्ष पेड़।
सभी लोगों ने बखान किया,
पर्वतराज हिमालय का।
सुमेरू से लाये संजीवनी बूटी,
राम भक्त महाबली हनुमान ने।
उस पर्वत से मिला संजीवनी,
सभी लोग गुणगान करने लगे।
संजीवनी बूटी से जान बचा,
राम भ्राता लक्ष्मण का,
आंधी,तूफान आने पर,
इसकी शरण मे रहते है।
भारत का मान बढ़ा रहा,
हिमालय की ऊंची चोटी।
हिमालय पर्वत के आंचल मे,
कई पवित्र स्थल हुये।
जो बद्रीनाथ,केदारनाथ और,
अमरनाथ नाम से जाने गये।
भारत की शान हिमालय पर्वत
हमे इसको बचाना है,
ये भारत की शान है।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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