कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मजबूर है मजदूर
मजबूर है मजदूर
जिंदगी के तलाश में हम।
मौत के करीब आ गये।
लाॅकडाऊन के चलते हम।
जहां के तहां रह गये।
घर द्वार के साथ-साथ।
मेरा गांव भी बिछड़ गया।
भूख के मारे तड़प रहे।
भीख मांग के खा रहे।
निकला हूं घर जाने को।
बिना खाने के डोल रहा।
जिस रोड़ में चलते हो।
वह रोड़ मैने बनाया है।
मजबूर हुए मजदूर आज।
पथिक बन चलने को आज।
ट्रक,बस रोड़ मे कुचल रहे।
बचे तो भूख प्यास से मर रहे।
कुर्सी मे बैठे वो साहब।
बने पड़े हो आज नवाब।
इस तपती धूप में आज।
चलने को मजबूर है।
आज मजदूर दुष्काल है।
भूख,प्यास से बेहाल है।
घर जाने के उत्साह में।
सब निकल बड़े मजदूर।
किसने सोचा ऐसा भी एक दिन आयेगा।
हाहाकार मचाने आयेगा।
लाॅकडाऊन के चलते हम।
जहां का तहां रह गये।
भूख के कारण गरीब ही,
क्यों मारे जाते है?
सुनिए सरकार "परमानंद" का
जल्दी से पड़ताल करवाये।।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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