कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पर्यावरण
पर्यावरण
आओ मिलके विश्व पर्यावरण दिवस मनाए,
जन-जन में पर्यावरण का जागरूकता जगाए।
इंसान अंधाधुंध पेड़ पौधों को काट रहे है।
और पर्यावरण से खिलवाड़ कर रहे है।
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आज हर जगह स्वच्छता दिखाई देगा,
कल फिर भारती मां को प्रदूषित कर देगा।
पेड़ पौधों व जीव जंतु का सम्मान करो,
प्रकृति से कभी न खिलवाड़ करो।
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आज याद आया पर्यावरण व मानव का रिश्ता,
फिर वही रिश्ते में जहर फैलायेगा।
पेड़ लगाओ,पेड़ बचाओ का नारा हम लगायेंगे,
फिर लाखों पेड़ो को हम काट जायेंगे।
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हमें ऐसा कुछ काम कर जाना है,
पेड़ और फूल को हमें नही तोड़ना है।
प्रकृति और पर्यावरण हमारा आर्कषण है,
युग-युग से सुंदर सारे काम तुम कराती है।
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सांस मनुज की आंधी-सी,
करती होगी उसको हैरान।
बादल क्रोधित नभ घनघोर,
बिजली चमक रही चारो ओर।
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प्रकृति से नही करो खिलवाड़,
वरना झेलो प्रकृति का प्रहार।
न काटों पेड़ पौधों को उनसे मिलता हमको छाँव,
इस तपती धूप में नही तो जल जाता हमारा पाँव।
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ग्लोबल वार्मिंग के कारण खतरे मे जान,
पर्यावरण हमें बचाना है वह है सबकी शान।
खुद की हरियाली त्याग कर हमें जीवन देती है,
वो पर्यावरण नही भगवान का अवतार है।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम- निठोरा,पो.- थरगाँव
तह.- कसडोल,जिला- बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- Sachinnishad343@gmail.com
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