क्रमाॅंक:- 113 कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- नेक कर्म की यादें
नेक कर्म की यादें
इरादों के दरिया पार कर,
कोई समझौता नहीं करता।
साथ छूट जाता है भले ही,
नेक कर्म की यादें नहीं मरता।१।
आए हो इस रंग मंच में,
"प्रिय" जरा सोच तो लो।
जिंदगी में बुराई करने के बदले,
जीवन को आदर्शों से भर लो।२।
कर्म कुछ ऐसा करो,
किस्मत बदल जाए।
रखो सकारात्मक सोच,
जिससे जीवन चमक जाए।३।
जीवन में कर्म करना है,
फल की चिंता छोड़ना है।
जिन्दगी के इस दौड़ में,
मदद सबका करना है।४।
इस कर्म युद्ध की दौर में,
अपनों में सब खोए हुए हैं।
सकारात्मक रवैया भूलकर,
नकारात्मक में सब खोए हुए हैं।५।
रखो हौंसला बुलंदी की,
कमजोर कभी न होना।
रखो तुम मजबूत इरादा,
कभी हार न मानना।६।
अपनी वाणी से सदा,
मीठा बोला करना।
जो कटु शब्द बोले,
"प्रिय" उन्हें माफ करना।७।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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