क्रमाॅंक:- 132, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- गर्मी में महंगाई की मार
गर्मी में महंगाई की मार
गर्मी ने तापमान बढ़ा दिए हैं,
फलों की मांग बढ़ा दिए हैं।
सुना है हर गली और चौराहा,
सबकी समस्या बढ़ा दिए हैं।१।
मची हुई है महंगाई की मार,
बढ़ा दिए हैं जेबों के भार।
दो वक्त की रोटी कमाने को,
गरीब झेल रहे बोझों की मार।२।
बोझा ढो रहे तपती धूप में,
इस महंगाई की मार में।
गरीब बेचारा क्या? करें,
इस महंगाई की मार में।३।
कमर तोड़ के रख दिया है,
पेट्रोल,डीजल,फलों के दाम।
जब आये गर्मी का मौसम,
बड़ जाता महंगाई का दाम।४।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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