क्रमाॅंक:- 138, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- चढ़ता घमंड
चढ़ता घमंड
चढ़ता घमंड में इंसान,
रिश्तें-नाते भूल जाते हैं।
पैसों का रौब दिखाकर,
चढ़ता घमंड दिखा जाते हैं।१।
मूल्य नहीं समझे इंसानों का,
पैसों का घमंड बता रहे इंसान।
खूद पर घमंड होने के कारण,
मारा गया जैसा रावण,दुर्योधन।२।
घमंड का घर खाली हो जाता,
वो कभी सुख नहीं पाता।
लोगोंं के नजर में गिर जाते हैं,
घमंडी इज्जत कमा नहीं पाता।३।
जो घमंड के परे है वो इंसान,
अक्सर सुखी से जीता है।
जो पैसों के घमंड में चूर है,
वो इंसान बद्दुआएं लेकर जीता है।४।
परमानंद निषाद"प्रिय"
साहित्य साधना सभा,छत्तीसगढ़
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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