क्रमाॅंक:- 143, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- हसदेव के गोहार
हसदेव के गोहार
हसदेव अरण्य काट रहे,
इंसान संकट को बुला रहे।
मानवता अब खत्म हो रहा,
प्रकृति से खिलवाड़ कर रहे।१।
हसदेव की गोहार नहीं सुन रहे,
जीवनदायिनी को सब काट रहे।
प्रकृति नष्ट होने से आज,
सब इंसान आज रो रहे।२।
पेड़-पौधे को सब काट रहे,
बंजर भूमि को बना रहे।
बना दिये भूमि को बंजर अब,
अन्न के लिए सब तरह रहे।३।
पेड़-पौधे काटे जाने से,
नहीं मिल रहा है छाॅंव।
ग्रीष्म के तपती धूप में,
जल रहे हैं सबके पाॅंव।४।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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