क्रमाॅंक:- 149, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- फलों के राजा आम
फलों के राजा आम
पके हुए हैं आम ,बता दो उनके दाम।
छोटे,बड़े रसदार पके हुए हैं आम।
रसदार और मीठे होते हैं,
फलों के राजा पीले आम।१।
छोटी-छोटी टहनियों के पत्तों पर,
लटक रहे हैं छोटे-बड़े पीले आम।
जब नज़र पड़ती है टहनियों पर,
दिखाई पड़ते हैं पके हुए आम।२।
छोटे पेड़ पर फले हुए हैं आम,
बड़े मजे से खाते हैं पके आम।
पके हुए फलों को चखने खातिर,
लोग घूमते रहते हैं आम पेड़ के नीचे।३।
बड़ी मुश्किल में मिलते हैं पके आम,
डर जाते हैं सब पहरेदार के लठ्ठ से।
चूस-चूस कर खाते पके पीले आम,
छुप कर खाते आम बचने पापा की डाँट से।४।
देखकर पके पीले आमों को,
खुद को रोक नहीं पाते थे।
बचपन में दादा जी हमारे लिए,
खट्टे-मीठे पके पीले आम लाते थे।५।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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