क्रमाॅंक:- 150, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- संघर्ष ही जीवन है
संघर्ष ही जीवन है
छोटी-छोटी खुशियाॅं बड़ी बन जाती हैं।
छोटी खुशियाॅं जीने का सहारा बन जाती हैं।
जिस प्रकार बूॅंद-बूॅंद से घड़ा भरता है,
वैसे ही जीवन में खुशियाॅं फैलती जाती है।१।
मिल रहे जीवन में खुशियों को,
सदा मुस्कुराकर जीते जाओ।
जब जीवन में गम आ जाये,
खुशियों से गम मिटाते जाओ।२।
जीवन में संघर्ष करना पड़ता है।
हर संकट से लड़ना पड़ता है।
चाहे आ जाये जीवन में क्यों न गम,
सदा मुस्कुराकर जीना पड़ता है।३।
क्यों न तपती धूप हो या छाॅंव,
जीवन के संघर्ष में छाले पड़ जाते पाॅंव।
परिवार की खुशियों के खातिर मजदूर,
शहर आते मेहनत करने छोड़ अपने गाॅंव।४।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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