क्रमाॅंक:- 200, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- ममता की छाॅंव में
ममता की छाॅंव
गुजर गया मेरा बचपन,
ममता की छाॅंव में।
मैं हर पल रहा करता,
ममता की छाॅंव में।१।
बचपन में नहीं मालूम था,
भेद - भाव का ज्ञान।
माॅं का अद्भुत प्रेम छुपा है,
ममता की छाॅंव में।2।
माॅं ने हमको चलना सीखाया,
चोट लगने पर सीने से लगाया।
माॅं ने हमको पढ़ना सीखाया,
ममता। की छाॅंव। में।३।
कब बड़ा हुआ पता न चला,
मेरा बचपन इस गाॅंव में।
बैठा रहता मैं बचपन में,
ममता की छाॅंव में।४।
स्कूल में जब प्रथम आया,
खुशी के अश्रु बहे माॅं का।
माॅं का मेहनत सफल हुआ,
ममता की छाॅंव में।५।
जीवनसंगनी मुझको मिला,
माॅं के आर्शिवाद से।
प्यार,दुलार हमको मिला,
ममता की छाॅंव में।६।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
8435298085
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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