क्रमाॅंक:- 210, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मै हूॅं बालक एक नादान
मै हूॅं बालक एक नादान
मेरे कोमल हाथों से कलम मुझे चलाने दो।
ज्ञान के भंडार को मुझे समेटने दो।
मैं छोटा बालक हूॅं थोड़ा मुझे संभलने दो।
ज्ञान रूपी प्रकाश से मुझे सॅंवरने दो।१।
अपने पाॅंव में खड़े होकर मुझे चलने दो।
जीवन के कठिन राह से मुझे लड़ने दो।
पाकर शिक्षा ज्ञान का मुझे मंजिल पाने दो।
ज्ञान रूपी प्रकाश से मुझे सॅंवरने दो।२।
ज्ञान प्राप्ति के लिए मुझे आगे बढ़ने दो।
कलम को बनाके अस्त्र मुझे पहचान बनाने दो।
मन में जो इच्छाएं हैं उसे मुझे कहने दो।
ज्ञान रूपी प्रकाश से मुझे सॅंवरने दो।३।
मेरे हर ख्वाबों को यूॅ़ं ना कभी टूटने दो।
कठिनाइयों से लड़ने को मुझे हौंसला रखने दो।
माॅं शारदे सदा मुझे विद्या का गहना दो।
ज्ञान रूपी प्रकाश से मुझे सॅंवरने दो।४।
अनुशासन का पालन कर मुझे आगे बढ़ने दो।
जीवन में कठिन दुखों को मुझे सहने दो।
बाल रूपी हृदय खिला अब उसे महकने दो।
ज्ञान रूपी प्रकाश से मुझे सॅंवरने दो।५।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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