क्रमाॅंक:- 212, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष दोहा छंद रचना- द्वितीय रूप- माॅं ब्रह्मचारिणी
माॅं ब्रह्मचारिणी
नव दुर्गा का रूप है; ब्रह्मचारिणी नाम।
तू ही ज्ञान प्रधान है; देती विद्या काम।।१।।
तप बल से ही प्राप्त है; हमको विद्या ज्ञान।
ब्रह्मचारिणी से मिला; हमको विद्या दान।।२।।
शोभित बाऍं हाथ है; होत कमंडल मात।
नौ रूपों का रूप है; संकट हरती मात।।३।।
ब्रह्मचारिणी रूप है; माता का अवतार।
माता की पूजा करें; हमको देती प्यार।।४।।
दाय हाथ माला लिए; देती उत्तम ज्ञान।
मात करें आह्वान को; सदा मिले वरदान।।५।।
मन में छिपे तिमीर को; दूर करो हे मात।
अंतर्मन में हैं छिपे; मन के सारे बात।।६।।
प्रिय करता है प्रार्थना; दिन द्वितीय नवरात।
हर लेती माॅं दुःख को; ब्रह्मचारिणी मात।।७।।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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