क्रमाॅंक:- 220, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- मोर जिनगी बनाही दुर्गा मइया
मोर जिनगी बनाही दुर्गा मइया
नौ दिन बर आगे; मोर दुर्गा मइया।
मोर जिनगी ल सुग्घर; बनाही मोर मइया।।
बड़ दुख ले घेराव हॅंव; मइया पार लगा दे।
मइया मोर जिनगी ल; सुग्घर तॅंय बना दे।।
मइया ले दुख के पीरा; कभू छुप नइ पइस।
जिनगी के दरद ल जानके; मइया दरद मिटइस।।
आसरा ले ज्यादा मइया; मया दुलार पायेंव।
मिटगे दुख के जिनगानी; सुखी जिनगी ल पायेंव।।
जबले अइस मइया; मोर घर के ॲंगना।
जिनगी ले होगे; दुख,दरद के भगना।।
मइया हे दुर्गा; सबके चिंता करइया।
जिनगी के रस्ता म; हाथ के थमइया।।
मइया के बखान ल; सबला मॅंय सुनाय
जिनगी ल तॅंय मोर; मइया सुग्घर बनाय।।
हरेक नवरात्रि म मइया; आबे मोर ॲंगना।
बजावत आबे तॅंय मइया; हाथ के तोर कंगना।।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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