क्रमाॅंक:- 224, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- छा गये संस्कार मंच
छा गये संस्कार मंच
दहलीज पर बैठकर करता रहा इंतजार।
सभी कविगण मित्र आये मेरे दरबार।
देख उनको मन में हुआ उत्सुकता व आनंद।
सदा मिला संस्कार मंच से प्यार व दुलार।
मेरे दहलीज पे आकर छोड़ गये सब छाप।
सभी कविगण सबके दिलों में घर कर आये।
चाहकर भी ना जा सके इसका है मलाल।
कविगण संस्कार मंच का छाप छोड़ आये।।
गायक,गायिका,हास्य,श्रृंगार का भरमार है।
परशु,रुचि,अनुषा व मस्ताना जहाँ हो।
मन में साहित्य कला हम छिपाये बैठे थे।
प्रिय को पहचान मिला जहाँ संस्कार मंच हो
हास्य रस के कवि डुबकी लगाये बैठे हैं।
संस्कार मंच की शान मानक, गोकुलानंद।
श्रृंगार रस की कवियित्री है रूकमणी भोई।
इनकी रचना सुनकर हो जाते सब आनंद।।
परमानंद निषाद"प्रिय"
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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