क्रमाॅंक:- 252, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- बाबा गुरु घासीदास की पुण्य स्मरण
संत श्री गुरु घासीदास बाबा,
संत संप्रदाय के सर्वोपरि माने जाते।
बाल्यावस्था से ही कुप्रथा पर,
सामाजिक सेवा में जीवन बीते।।
संत बाबा को करते स्मरण,
बाल्यकाल की जीवन-गाथा।
समाज सेवी एकता, भाईचारा का
महान पुरुष का चमके माथा।।
गिरौदपुरी धाम के लोगों को,
गुरु घासीदास से जीने की प्रेरणा मिली।
संत सतनाम के प्रचारक थे,
उनके उपदेशों से समाज को प्रेरणा मिला।।
सतनाम संप्रदाय के संस्थापक,
गुरु घासीदास बाबा थे।
छूआछूत और जाति-पाती की,
सामाजिक कुप्रथाएं दूर किये थे।।
बढ़ते कुप्रथाओं को देख,
हर जगह प्रचार करने लगे।
बाबा कुप्रथाओं के खिलाफ थे,
सात्विक जीवन का संदेश देने लगे।।
सतनाम प्रतीक के रूप में,
जैतखाम में सफेद झंडा फहराया।
सकारात्मक,ऊँचें विचार धाराओं के साथ,
संत संप्रदाय का ज्ञान सबको बतलाया।।
गुरु घासीदास बाबा की जयंती को,
हर वर्ष मनाते हैं अठ्ठारह दिसम्बर।
पुष्प वाटिका में मनाते खुशियाँ
गुरु घासीदास को हर वर्ष प्रणाम बारम्बार।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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