क्रमाॅंक:- 296, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- यतीम
सुंदर सा यह संसार है।
फिर भी जीते कई यतीम।।
जीना हो जाता है दुश्वार।
यतीम बच्चों को दो प्यार।।
जीने का अधिकार सभी को,
सदा देखे उगते आदित्य को।।
पकड़े हुए हाथ में कटोरा,
रोज सड़कों में फिरते हैं।।
दुर्लभ जीवन यतीम को।
सदा ही अपराध कराता है।।
उन्हें जिम्मेदारी सिखाना है।
यतीम को मान दिलाना है।।
अमीर,गरीब यतीम एक समान।
सबको बनाये हैं भगवान।।
अहंकार में चूर होकर अमीर।
भूल जाते हैं करना प्यार।।
यतीम को समझते हैं कीड़ा।
अमीर देते हैं सदा ही पीड़ा।।
माता-पिता नहीं यतीम का,
उसमें उनका क्या दोष है?
जन्म लिए है दुर्भाग्य से तो,
यतीम का क्या कसूर है?
इस भीड़ भाड़ की दुनिया में,
देखें है यतीम दुनिया में।।
यतीम बच्चे मेहनत करते हैं।
स्वयं पेट की भुख मिटाते हैं।।
यतीम भाग्य दुर्भाग्य में पलता।
लोगों की कड़वी बातें सुनकर जीता।।
सच्चे मन से मानव मदद करो।
यतीम बच्चों का तुम उपकार करो।।
आओ मिलकर सब शपथ करें।
यतीम बच्चों का हम सहयोग करें।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
0 Response to "क्रमाॅंक:- 296, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- यतीम"
एक टिप्पणी भेजें