क्रमाॅंक:- 301, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- भारतीय संस्कृति और परम्परा
सुबह की नई किरण से,
आलस का त्याग करना है।
चहक रही है सारे पक्षी,
तन,मन स्वस्थ रखना है।।
बड़ों के समक्ष सिर झुकाओ,
सदा पाओ उनका आर्शीवाद।
पहनकर अपना स्कूली कपड़ा,
माता-पिता से पाओ आर्शीवाद।।
तन - मन से हमें पढ़ना है,
माता-पिता का नाम रोशन करना है।
सदा रहो तुम अनुशासन में,
खुद पर विश्वास रखना है।।
सदा ही जीवन में सुकर्म करो,
माता-पिता को सदा तुमपे गर्व।
गरीबों की तुम सदा सेवा करो,
दीनहीन के साथ सदा मनाओ पर्व।।
हमारा भारत सुंदर प्यारा है,
सदा रहे ऊंचा तिरंगा हमारा।
भारत देश के शान है तिरंगा,
सदा तिरंगा को सलाम हमारा।।
अनुशासन में सदा रहना है।
भारत का नाम रोशन करना है।
आओ तिरंगा झंडा के समक्ष,
मिलकर राष्ट्रगान हमें गाना है।।
तिरंगा झंडे पर हमें नाज है।
हम सब भारत वासियों को,
शहीद जवान को शान से,
तिरंगे का कफन देते है।।
ऐसा प्यारा देश हमारा।
परम्पराराओं से है पहचान।
सबसे बड़ा अखंड गणतंत्र,
ऐसा है मेरा देश महान।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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