क्रमाॅंक:- 311, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- संस्कार साहित्य के कविराज
संस्कार के दरबार में आये हैं कविराज।
हे विद्वान कविगण करो साहित्य में काज।।
पहली पूजा माँ शारदे करते कविराज।
माँ शारदे सुनो प्रार्थना रखना मेरी लाज।।
संस्कार का मान है मस्ताना धनीराम।
जग के पालनहार हैं रघुवीर श्रीराम।।
सुरों के सरताज है गज़लकार परशुराम।
अपनी लेखनी साज के करते हैं आराम।।
हास्य व्यंग्य के पिटारे हैं गोकुलानंद।
साहित्य का परिवार बना युवा परमानंद।
जोगी,रूचि,प्रेम व गीता छंदकार है।
सभी रचनाकारों को संस्कार से प्यार है।।
अलकरहा की रचना तो बेजान में लाते जान।
जान की मिमिक्री सुन गदगद होता सारा जहान।।
डीजेन्द्र की कविता से मिलता सबको शौर्य।
खीरसागर,देवदास हैं मन से सदा धैर्य।।
सभी विधा में सुंदर,मानक देते ज्ञान।
भार,भोई,चन्दर हैं संस्कार का मान।।
शंकर,तेरस,नायक हैं संस्कार के आन।
बनके एक परिवार सभी संस्कार के शान।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
0 Response to "क्रमाॅंक:- 311, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- संस्कार साहित्य के कविराज "
एक टिप्पणी भेजें