क्रमाॅंक:- 315, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- पतझड़ के मौसम
पेड़ों से पत्ता झड़े; पत्ता गिरता रोज।
धूप में पसीना बहे; तपसी बढ़ता रोज।1।
जिंदगी पतझड़ होत है; पेड़ के सुखे डाल।
पेड़ सुखे है धूप में; जीवन जैसे काल।2।
बढ़ता जाता धूप तो; सब होत परेशान।
गर्म हवा के मार से; ब्याकुल है इंसान।3।
ए पतझड़ के मौसम में; जलता सबके पाँव।
नंगें पाँव चलो नहीं; मिलता ना ही छाँव।4।
पतझड़ बना है जिंदगी; सफल करो तुम काज।
जंगल रक्षा के लिए; पेड़ लगाओ आज।5।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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