क्रमाॅंक:- 319, कसडोल, जिला-बलौदा बाजार (छत्तीसगढ़) से कवि परमानंद निषाद"प्रिय" की विशेष रचना- अभिलाषा तेरे प्यार की
करूँ अभिलाषा तेरे प्यार की,
लगा मुझ पर प्रेम का रोग।
मन ही मन तुझसे प्यार किया,
मेरे प्यार को ना पसंद करते लोग।।
मेरे होंठों पर बस तेरा ही नाम।
सभी अफवाहों से मैं था दूर।
संदेह ना कर मेरी अभिलाषा पर,
प्यार का सुख तुझको दूँगा भरपूर।।
चाहत तेरा वर बनने का था।
बहु बनाकर लाये निषाद परिवार।
एक - दूजे की मन की अभिलाषा।
बन जा तू 'परमानंद' का आधार।।
कृष्ण जैसे बनने की अभिलाषा थी।
मानव ने जगाया मन में संदेह।
कृष्ण प्रेम कभी पा सकते नहीं,
तुझसे किया अभिलाषा की स्नेह।।
प्रेम रतन मिला अभिलाषा की,
जिससे जगा मन में विश्वास।
हरपल तुझसे निश्छल प्रेम किया।
जिंदगी भर रहे हम दोनों पास।।
परमानंद निषाद'प्रिय'
ग्राम - निठोरा,पोस्ट - थरगाॅंव,
तह.-कसडोल,जिला-बलौदा बाजार(छ.ग.)
मो.- 7974389033
ईमेल- sachinnishad343@gmail.com
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